SIR की घोषणा के बाद दहशत, भारत से भागने की कोशिश कर रहे 48 बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में SIR के ऐलान के बाद घबराहट बढ़ी। बशीरहाट सीमा से 48 बांग्लादेशी गिरफ्तार, बीरभूम में पैनिक के बीच लोगों ने बैंक से सेविंग्स निकालीं।

हिंदी: Nov 2, 2025 - 02:59
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SIR की घोषणा के बाद दहशत, भारत से भागने की कोशिश कर रहे 48 बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार

कोलकाता, SIR के ऐलान के बाद पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों में दहशत मची हुई है। पश्चिम बंगाल में कम से कम 48 बांग्लादेशी घुसपैठियों को उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वे उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट सीमा क्षेत्र से अवैध रूप से दूसरे देश में जाने की कोशिश कर रहे थे। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। 

अधिकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की घोषणा के बाद ये घुसपैठिए भारत छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारी ने बताया कि रविवार को बीएसएफ ने 33 बांग्लादेशियों को पकड़कर स्वरूपनगर पुलिस थाने को सौंप दिया जबकि शनिवार रात 15 अन्य को गिरफ्तार किया गया। 

बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोग पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में घरेलू सहायकों व दिहाड़ी मजदूरों के तौर पर काम करते थे। उन्होंने कहा कि ‘‘एसआईआर की घोषणा के बाद हिरासत में लिए जाने या निर्वासित किए जाने के डर से’’ वे अपने देश लौटने की कोशिश कर रहे थे। एसआईआर के दौरान बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) मतदाताओं के विवरण की पुष्टि के लिए घर-घर जाकर संपर्क करते हैं। 

घबराहट का दूसरा नाम है ‘SIR’!

उधर, पश्चिम बंगाल के बीरभूम में भी SIR को लेकर पैनिक है। इसी पैनिक की वजह से दो दिन पहले खितिश मजूमदार ने सुसाइड कर लिया। इलमबाजार के लेलेघर के बांध पारा और नीचू पारा में कई लोग पैनिक में हैं और बैंक से अपनी सारी सेविंग्स निकाल रहे हैं। लोकल लोगों का एक ग्रुप कह रहा है, “अगर SIR लागू हुआ, तो हमारे बैंक अकाउंट बंद हो जाएंगे। फिर हमने जो पैसे बचाए हैं, वे नहीं निकल पाएंगे।”

दूसरी तरफ, कुछ लोग कह रहे हैं, “अगर SIR लागू हुआ, तो हमें बांग्लादेश जाना पड़ सकता है।” वे इसी डर की वजह से बैंक से पैसे निकाल रहे हैं।” इस इलाके का ज्यादातर लोग हिंदू समुदाय से है, लेकिन CAA के तहत उनके पास कोई नागरिकता सर्टिफिकेट नहीं है।

साथ ही, डरे हुए इलाके के कई लोगों ने बताया है कि उनके माता-पिता या दादा-दादी 30-35 साल पहले इंडिया आए थे। उस समय वे रोजी-रोटी की तलाश में एक राज्य से दूसरे राज्य में काम करने जाते थे। इस वजह से, कई लोगों के पास नागरिकता के डॉक्यूमेंट नहीं थे। अब, उन डॉक्यूमेंट की कमी से चिंता बढ़ रही है।

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